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धोखाधड़ी करने वाले तीन वारंटी गिरफ्तार

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 धोखाधड़ी करने वाले तीन वारंटी गिरफ्तार, कांग्रेस पार्षद पति भी चढ़ा पुलिस के हत्थे हरिद्वार ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने तीन वारंटीयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम शौकीन पुत्र तहसीन निवासी बकरा मार्केट ज्वालापुर, जान आलम उर्फ मोनू पुत्र बशीर अहमद निवासी पांवधोई मोहल्ला ज्वालापुर, और अमन शर्मा पुत्र मनोज शर्मा निवासी कपिल मार्केट कनखल है। आरोपी शौकीन पर चेक बाउंस धोखाधड़ी के आरोप है। जिस पर ज्वालापुर कोतवाली में आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज है। इसके साथ ही दोनों आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे थे। लेकिन हरिद्वार के पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर सभी थानों को वारंटियों की धरपकड़ पुलिस ने फरार चल रहे वांछित अपराधियों और वारंटी को गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए गए थे। जिसके अनुपालन में ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने तीनों वारंटीयों को अलग-अलग क्षेत्रों से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है।

(अद्भुत प्रसंग, भावविभोर करने वाला प्रसंग जरुर प्ढ़े) बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है, पर तमिल भाषा में लिखी *महर्षि कम्बन की #इरामावतारम्'* मे यह कथा है।  

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सुदीप कपुरवान  द्वारा साभार  (अद्भुत प्रसंग, भावविभोर करने वाला प्रसंग जरुर प्ढ़े) बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है, पर तमिल भाषा में लिखी *महर्षि कम्बन की #इरामावतारम्'* मे यह कथा है।   रावण केवल शिवभक्त, विद्वान एवं वीर ही नहीं, अति-मानववादी भी था..। उसे भविष्य का पता था..। वह जानता था कि श्रीराम से जीत पाना उसके लिए असंभव है..। जब श्री राम ने खर-दूषण का सहज ही बध कर दिया तब तुलसी कृत मानस में भी रावण के मन भाव लिखे हैं-- खर दूसन मो सम बलवंता । तिनहि को मरहि बिनु भगवंता।। रावण के पास जामवंत जी को #आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा गया..। जामवन्त जी दीर्घाकार थे, वे आकार में कुम्भकर्ण से तनिक ही छोटे थे। लंका में प्रहरी भी हाथ जोड़कर मार्ग दिखा रहे थे। इस प्रकार जामवन्त को किसी से कुछ पूछना नहीं पड़ा। स्वयं रावण को उन्हें राजद्वार पर अभिवादन का उपक्रम करते देख जामवन्त ने मुस्कराते हुए कहा कि मैं अभिनंदन का पात्र नहीं हूँ। मैं वनवासी राम का दूत बनकर आया हूँ। उन्होंने तुम्हें सादर प्रणाम कहा है। रावण ने सविनय कहा– &