साध्वी त्रिकाल भवंता के कुंभ मेले में शाही स्नान और जमीन की मांग करने को लेकर हुआ विवाद





 


हरिद्वार-साध्वी त्रिकाल भवंता के कुंभ मेले में शाही स्नान और जमीन की मांग करने को लेकर हुआ विवाद खड़ा अखिल भारतीय अखाड़ा अध्यक्ष ने मन मुखी संत बताकर दीया फर्जी करार

 कुभ का आयोजन होने में अब कुछ ही समय शेष है मेला प्रशासन की तरफ से मेले को भव्य बनाने की पूरी तैयारी की जा रही है. कुंभ मेला प्रशासन की तैयारियां भी अपने अंतिम चरण में चल रही हैं 2021 कुंभ को प्रयागराज में हुए कुंभ की तरह भव्य और दिव्य बनाए जाने की बात कही जाती रही है इसी कड़ी में अब प्रयागराज में हुए कुंभ की तर्ज पर महिला संतों के परी अखाड़े ने पुरुष अखाड़ों के संतों की तरह ही अलग से शाही स्नान और बाकी सुविधाएं दिए जाने की मांग की है परी अखाड़े की शंकराचार्य साध्वी त्रिकाल भवंता हरिद्वार पहुंचीं और उन्होंने मेला नियंत्रण भवन पहुंचकर अधिकारियों से बातचीत की वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा इसका विरोध किया गया और उन्होंने कहा कि परी अखाड़े की कोई मान्यता नहीं है त्रिकाल भवंता का कोई गुरु नहीं है वह स्वयंभू संत बन गई और महिला होने का नाजायज फायदा उठाती है और हर मेले में विघ्न डालने पहुंच जाती है सिर्फ चार ही पीठ के शंकराचार्य होते हैं बाकी सब फर्जी है

शंभू शंकराचार्य साध्वी त्रिकाल भवंता का कहना है कुंभ मेले में पुरुष शंकराचार्य को जो भी सुविधा मेला प्रशासन द्वारा दी जाती है वह महिला शंकराचार्य को भी दी जानी चाहिए तेरा अखाड़े पुरुष के हैं उनको पूरी सुविधा देता है शाही स्नान के लिए जगह भी देते हैं उसी तरह से हमारे महिला अखाड़े को सभी सुविधाएं और शाही स्नान के लिए स्थान दे यह व्यवस्था कुंभ की है मेला प्रशासन की तरफ से पुरुष अखाड़े से अच्छी व्यवस्था महिला अखाड़ों को देनी चाहिए यह हमारी मांग है इसको लेकर हमने मेला अधिकारी और अपन मेला अधिकारी से मुलाकात की है




अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी खुलकर साध्वी त्रिकाल भवंता के विरोध में आ गए हैं नरेंद्र गिरी का कहना है कि परी अखाड़े की कोई मान्यता नहीं है जो हमारी माताएं बहने साध्वी हमारी परंपरा से है रितंभरा दीदी उमा भारती सहित कई साध्वीया है जो परंपरा के अनुसार साध्वी बनी है उनका हम पूरा सम्मान करते हैं और कुंभ मेले में उनको पालकी में बिठाते हैं और गंगा स्नान कराते हैं त्रिकाल भवंता मन मुखी है ना कोई गुरु ना कोई चेला अपने आप भगवा पहन लिया अपने आप खड़ाऊं और माला पहन ली जैसे भैरूपिया होते हैं महिला होने का नाजायज फायदा ले रही है हम इसलिए नहीं बोलते कि वह महिला है उसका हम सम्मान करते हैं मगर परंपरा के विरुद्ध कोई कार्य करेगा तो अखाड़ा परिषद अध्यक्ष होने के नाते इसका विरोध करने का दायित्व बनता है का कहना है कि यह मेले में विघ्न डालने आती है और इनको कोई सफलता नहीं मिलती है किसी भी कुंभ में इनको जमीन नहीं दी गई और ना कोई सुविधा दी गई मन मुखी महात्मा का कोई मतलब नहीं है त्रिकाल भवंता को अखाड़ा परिषद ने पहले ही फर्जी संत करार दिया है हम चार ही पीठ के शंकराचार्य को जानते हैं इसके अलावा कोई भी शंकराचार्य लिखता है तो वह फर्जी है  




वहीं इस मामले में कुंभ मेले के अपर मेला अधिकारी हरवीर सिंह का कहना है कि परी अखाड़े की महिला संत ने हमसे मुलाकात की हैउनके द्वारा हमें बताया गया है कि इलाहाबाद कुंभ में उनको सुविधाएं प्राप्त हुई थी इसी तरह अर्ध कुंभ 2016 में भी सुविधाएं मिली थी उनके द्वारा हमें 2021 कुंभ मेले को लेकर आवेदन पत्र दिया गया है और समय आने पर इस पर विचार किया जाएगा क्योंकि उनके द्वारा जो बातें की गई है उस पर मंथन करना बाकी है कि इलाहाबाद कुंभ और हरिद्वार अर्ध कुंभ के स्तर पर निर्णय लिया जाए


बाइट -- हरवीर सिंह ---अपर मेला अधिकारी

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