हरिद्वार अब वनयजीवो के आतंक का गढ़ बनता जा रहा


 




गुलदार दहशत 




 

धार्मिक नगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार अब वनयजीवो के आतंक का गढ़ बनता जा रहा है । हरिद्वार वन प्रभाग व राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमाओं में बसे इस नगर के कई छेत्र मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर संवेदनशील बन गए है। हाल ही में जंगली गजराजों व गुलदारों के हमले में हुई मौतों ने वन महकमे की कार्यशैली पर जंहा  प्रश्न चिन्ह लगाया है तो  वन्हि महकमे द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण व संवर्धन किये जाने के दावों की पोल भी खोल दी है।

धर्म की पुण्यधरती व अध्यात्म की नगरी हरिद्वार का इन दिनों नया रूप देखने को मिल रहा है। शाम ढलते ही इस नगर के कई छेत्र की जनता आतंक के साये में जीने को मजबूर हो जाती है। ये ख़ौफ़ पैदा किया है यंहा स्थित जंगलो ने । शाम ढलते ही शिकार की तलाश में वन्यजीव इस नगर में अपना आतंक फैला देते है । लोगो की माने तो गुलदारों का ख़ौफ़ इतना है कि शाम ढलते ही वे अपने बच्चो को घर से बाहर भी नही जाने देते।लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी वन महकमा हर बार की तरह राटा रटाया जवाब देता है | महकमे के अधिकारियो का कहना है की गुलदार को पकड़ने के लिए उनके द्वारा कई टीम बना दी गई है और कैमरा ट्रैप से भी उस पर नजर राखी जा रही है इसके राजाजी से भी सहयोग लिया जा रहा है |  

राज्य में हर वर्ष करोड़ो रूपये का बजट मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए दिया जाता है । मगर इसके बावजूद भी आज तक इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस पहल नही शुरू हो पाई है। वहीँ महकमे की लचर कार्यप्रणाली के चलते समय समय पर जंहा इंसानो को इन घटनाओं में अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है तो वन्हि बेगुनाह वन्यजीवों के संरक्षण पर भी सवालिया निशान लग गए है | 


 






 


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