देश के अंतिम ऋतु प्रवासी पर्यटन गांव मणिभद्रपुर "माणा" में पसरा सन्नाटा

देश के अंतिम ऋतु प्रवासी पर्यटन गांव मणिभद्रपुर "माणा" में पसरा सन्नाटासंजय कुँवर बदरीनाथ
चारों धाम की यात्रा अब संपन्न हो चुकी है जिसके बाद से चारों धाम के आसपास के गांव में भी सन्नाटा पसर चुका है,भारत चीन सीमा के अंतिम छोर पर बसे देश के इस ऋतु प्रवासी भोटिया जनजाती बाहुल्य पर्यटन गांव माणा,जिसे मणिभद्र पुर के नाम से भी जाना जाता है,में भी अब सन्नाटा पसरा हुआ है यहाँ के ग्रामीण ग्रीष्मकालीन आवासीय प्रवास के लिए यहां से अपने  6मासा निवास स्थान की और रवाना हो चुके हैं ,गांव में ताले लगाए जा चुके हैं बता दें कि कड़ाके की ठंड में यहां लोगों के लिए रहना मुश्किल हो जाता है इसलिए लोग ग्रीष्मकालीन क्षेत्रों में चले जाते हैं माणा गांव बद्रीनाथ धाम के पास स्थित है जो कि देश का अंतिम गांव माना जाता है इस गांव को भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी पर्यटक गांव के नाम से जाना जाता है, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद माना गाँव 6माह तक तीर्थयात्रियो और देशी विदेशी पर्यटको से गुलजार रहता है,माणा गांव के पास ही सेना के कैंप है और सेना के जवान यही से देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं अग्रिम चौकियों पर यहीं से सेना और itbp के जवान आवागमन करते हैं भारी बर्फबारी के बाद माना गांव में मौसम काफी ठंडा हो जाता है ,हालांकि अभी गांव में कोई नहीं है लेकिन सेना और ITBP के हिम वीर जवान सरहदी बोर्डर छेत्र होने के चलते यहाँ सीमाओ की रक्षा के लिए 12माह यही डटे रहते है,


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